कोरोना पर कुछ पंक्तियां पेश कर रहा हूँ, अच्छी लगें तो शेयर जरूर करना ।

शांति का वातावरण, चारो तरफ छाया है,


देखो एक ये लम्हा भी, कैसा आया है।



चारो तरफ रहता था, मंजर कोलाहल वाला
लेकिन अब नहीं है कोई, शोर गुल हंगामों वाला।


प्रकृति से छेड़छाड़ का ये नतीजा आया है,                          वन्य जीव खुशहाल और मनुष्य घबराया है।



हो जायेंगे दूर ये, मुसीबत के लम्हे भी,
धैर्य और अनुशासन से कट जाएंगे ये पल भी ।


 


सलाम इंडिया के  लिए अंकित मिश्रा के द्वारा भेजी गई रचना।


अंकित मिश्रा एक स्टूडेंट हैं,लिखना और पढ़ना उन्हें अच्छा लगता है।लेखन में इनकी रुचि है।


 


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