पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनीप्रसाद वर्मा का निधन ,राजनैतिक गलियारों से लेकर उनके प्रशंसकों में शोक की लहर।
राज्यसभा सांसद और सपा नेता बेनी प्रसाद वर्मा का शुक्रवार शाम निधन हो गया, पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा काफी समय से अस्वस्थ्य चल रहे थे। लंबी बीमारी के बाद लखनऊ के निजी अस्पताल में शुक्रवार शाम को उन्होंने अंतिम सांस ली है।
दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री के निधन से परिवार और उनके प्रसंशकों में शोक की लहर है,
समाजवादी पार्टी के अधिकृत ट्विटर हैंडल से ट्विट भी किया गया है समाजवादी पार्टी की तरफ से पूर्व मंत्री वरिष्ठ नेता, राज्यसभा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री आदरणीय बेनी प्रसाद वर्मा जी एवं हम सबके प्रिय 'बाबू जी' जी का निधन अपूरणीय क्षति है। शोकाकुल परिजनों के प्रति संवेदना! शत-शत नमन एवं अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि।
हम आपको बता दें कि यूपीए की सरकार में मिनिस्टर रहे बेनी बाबू तब राहुल गांधी के चहेते नेताओं में गिने जाते थे, यहां आपको बता दें कि दिवंगत बेनी प्रसाद वर्मा 2007 में अपने बेटे के लिए टिकट चाहते थे , लेकिन तब एक नेेता की वजह से बेनी प्रसाद वर्मा के बेटे राकेश वर्मा को टिकट नहीं मिल पाया तो तब नाराज बेनी प्रसाद वर्मा ने समाजवादी पार्टी छोड़ दी थी और अपनी अलग राजनीतिक पार्टी समाजवादी क्रांति दल के नाम से बनाई थी लेकिन कांग्रेस के पहली पंक्ति के नेताओं के द्वारा बेनीप्रसाद वर्मा को तब मना लिया और साल 2008 में बेनी कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
बेनी प्रसाद वर्मा कई साल तक यूपी की सपा सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री भी रहे थे,हम आपको बता दें कि देवेगौड़ा सरकार के दौरान उन्होंने 1996 से 1998 तक केंद्र में संचार मंत्री का पद संभाला था तो वहीं 1998, 1999, 2004 और 2009 में गोंडा से सांसद चुने गए, जबकि यूपीए सरकार के दौरान 12 जुलाई 2011 को इस्पात मंत्री बनाए गए थे,आपको बता दें कि वर्ष 2008 में बेनी प्रसाद वर्मा कांग्रेस में शामिल होने के बाद 2009 में अपनी पुरानी सीट कैसरगंज की जगह 15 फीसदी कुर्मी मतदाता वाले संसदीय क्षेत्र गोंडा से चुनाव लड़ा था, चुनाव में वोटों का गणित उनके पक्ष में तब फिट बैठा और वे विजयी हुए , 2012 के विधासभा चुनाव में पिछड़े वर्ग के वोट बैंक को अपनी ओर खींचने के लिए कांग्रेस ने बेनी प्रसाद वर्मा को ही एक रणनीति के तहत आगे किया था, इसी रणनीति के तहत 2011 में पहले बेनी को इस्पात मंत्रालय में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया और अगले ही साल 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले उनका कद बढ़ाकर उन्हें इस्पात मंत्रालय का कैबिनेट मंत्री बना दिया गया था,हालांकि बेनी के रूप में कांग्रेस ने जो तब पिछड़ा कार्ड विधानसभा चुनाव में उन्हें आगे करके चला, लेकिन कामयाबी नहीं मिल पाई और वो प्लान फ्लॉप साबित हुआ था।
हालांकि विशेष तौर पर गोंडा, बाराबंकी जैसे कुर्मी बाहुल्य जनपदों में बेनी बाबू का जादू कभी लोगों के सिर चढ़कर बोलता था।
यूपी की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के साथ लंबे समय तक जुड़े रहे बेनीप्रसाद वर्मा वर्तमान में भी सपाई थे,औऱ काफी वक्त से उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था।प्रदेश सरकार से लेकर देश की सरकार में अहम भूमिका निभा चुके दिवंगत बेनी प्रसाद वर्मा समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे जिनकी गिनती दिग्गज राजनेताओं में होती थी।
बेनीप्रसाद वर्मा बहराइच की कैसरगंज लोकसभा सीट से चार बार सांसद चुने गए थे।राज्यसभा सांसद बेनी प्रसाद वर्मा को सलाम इंडिया परिवार की तरफ से श्रद्धांजलि।
... राजनैतिक डेस्क "सलाम इंडिया "की प्रस्तुति।