डँसजन्स

देशभर में कोरोना संक्रमण काल चल रहा है, लेकिन जिस तरह से केंद्र और प्रदेश सरकार की मंशा है कि जरूरतमंदों को खाद्यान्न उपलब्ध हो और सरकारी योजनाओं का शत प्रतिशत लाभ मिले  ये  कैसे सम्भव होगा जब गोलमाल गोलमाल सब हो रहा है।


  बुलन्दशहर में अब तक कई बार ऐसे बड़े मामले सामने आ चुके हैं जब गरीबों को और जरूरतमंद असल पात्रों को मिलने वाला गेहूं चावल सेठ साहूकारों के गोदाम में पकड़ा गया है । प्रशासनिक स्तर से तमाम कवायदें   की जा रही हैं, कि ऐसे लोगों पर सख्त एक्शन लिया जा रहा है ।लेकिन जमीनी तौर पर अगर देखा जाए तो ऐसा कहीं कुछ दूर तक भी नजर नहीं आ रहा है लॉकडाउन से अब तक कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुई हैं तो कुछ ऑडियो ही लगातार वायरल हुए हैं हालांकि कई पर वायरल होने के बाद कार्यवाही भी जिला प्रशासन ने की है लेकिन अभी भी देखा जा सकता है कि जो कोटेदार है वह पूरा राशन उपभोक्ता को देने को कतई तैयार नहीं है इसमें कहीं ना कहीं मिलीभगत की भी आती है क्योंकि जब कोटेदारों से बात की जाती है तो उनके पास कुछ जवाब होते हैं उन्हें ऊपर तक प्रसाद देना होता है आखिर यह प्रसाद खाने वाले कौन हैं और यह पैसा जब सरकार की योजना को जमीन पर उतरने से रोक रहे हैं तो इस प्रसाद को ग्रहण करने वाले वह कौन लोग हैं और इन पर शिकंजा क्यों नहीं कहा जाता खुलेआम गांव में कोटेदार मनमानी कर रहे हैं लगातार शिकायतें की जा रही हैं इतना ही नहीं मजे की बात तो यह है राशन कार्ड पर जो नंबर दिए गए हैं वह नंबर कभी मिलते ही नहीं है ऐसे में जरूरतमंद और जो लाभार्थी हैं उन्हें लाभ मिलने की बात तो दूर बल्कि उन्हें ग्रास रूट पर कैसे फायदा पहुंचेगा यह एक सफेद हाथी नजर आ रहा है