बुलंदशहर के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालक परेशान, लापरवाह डॉक्टर नहीं पहुंचते अस्पताल।
बुलंदशहर के गुलावठी ब्लॉक के गांव भटोना में यूं तो पशुओं का अस्पताल है,लेकिन ये सिर्फ कहने भर के लिए ही है,यही वजह है कि यहां पशुपालकों को खासी दिक्कतें बनी हुई हैं। धर्मेंद्र नाम के एक पशु चिक्तिसाधिकारी कि यूं तो गांव में नियुक्ति बताई जाती है, लेकिन यह डॉक्टर गांव में कभी नजर आता ही नहीं है कई बार गांव के आसपास के ग्रामीणों ने भी इस बारे में जिम्मेदारों से शिकायत की है, लेकिन कोई हल निकलता नजर नहीं आता है ।इस बारे में सलाम इंडिया से पशु पालकों ने बताया कि जिले के विभाग के बड़े अधिकारी को भी कई बार फोन किया तो वो फोन नहीं उठाते।
ग्रामीणों के सामने समस्या ये है कि आखिर जब ये पूरा क्षेत्र ही पशुपालकों का है और सरकारी अस्पताल में पशु डॉक्टर नहीं मिलेगा तो फिर उन्हें निजी झोलाछापों पर इलाज कराना मज़बूरी हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि सुबह 10:00 बजे चले जाओ चाहे उससे और पहले लेकिन डॉक्टर की पशुपालकों से मुलाकात यहां होती ही नहीं है।
हालांकि फोन पर अगर बात हो जाती है तो उसकी दो-तीन घंटे बाद निजी डॉक्टर की व्यवस्था कराने कि बात कहकर अतिरिकत फीस भी मांगी जाती है।एक पशुपालक ने बताया कि डॉक्टर अगर कभी मिल भी जाते हैं तो उनका कहना होता है कि अस्पताल में सरकार की तरफ से कोई दवाई या इंजेक्शन नहीं है, बाहर से लाना होगा।
इतना ही नहीं पशुओं को ग्याभिन करानेे केे लिये भी अतिरकित पैसे लेने का ग्रामीणों ने आरोप लगाया है।एक किसान ने बताया कि घंटों पशुओं को अस्पताल में ले जाकर बैठे इंतजार भी कई बार वह लोग करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र पशुपालको का क्षेत्र है जहां अत्यधिक संख्या में हर किसान के घर में पशु हैं और ऐसे में यहां चिकित्सक के द्वारा जो असहयोग भरा रवैया अपनाया जाता है वह सभी को पीड़ा पहुंचाता है।
ग्रामीणों के गम्भीर आरोप....सरकारी पशु अस्पताल के डॉक्टर के बारे में ग्रामीण गम्भीर आरोप भी लगाते हैं
ग्रामीणों का कहना है कि काफी बार तो ऐसा हुआ है कि जब डॉक्टर से इलाज करने के लिए कहा जाता है तो वह फोन पर बता देते हैं कि वह वैक्सीन के प्रोग्राम में अन्य कहीं काम कर रहे हैं और निजी चिकित्सक को भेज रहे हैं।
गुलावठी ब्लॉक के भटोना गांव में 10:00 बजे तक भी सुबह लगा हुआ ताला।
दस बजे तक भी नहीं आता कोई पशु चिकित्सक,
किसानों को हो रही परेशानी।
पशुपालकों का क्षेत्र होने के बावजूद भी बेसुध महकमा,
पहले भी कई बार की जा चुकीं शिकायतें,
नहीं लेता कोई सुध।
ग्रामीणों ने लगाया पशु चिकित्सक पर गम्भीर आरोप ,
निजी पशु चिकित्सकों का बहाना लेकर कुछ लड़कों से डॉक्टर कराता है इलाज, कभी नहीं पहुंचता पढू चिकित्सक अस्पताल में समय पर ,
घण्टो पशुपालकों को झेलनी पड़ती है परेशानी।
हर दिन का है यही हाल,
पशुओं को लेकर सरकारी पशु अस्पताल से वापिस बिना उपचार कराए लौटने को बेबस हैं पशुपालक।